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ग्रहों की स्थिति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

ग्रहों की स्थिति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

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 ग्रहों की स्थिति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य

"ज्योतिष और स्वास्थ्य का गहरा संबंध होता है।" यह मान्यता वैदिक ज्योतिष में सदियों से चली आ रही है। ग्रहों की स्थिति न केवल हमारे भाग्य और जीवन के अन्य पहलुओं को प्रभावित करती है, बल्कि हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालती है।

अगर कोई ग्रह जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है या किसी गलत भाव में स्थित होता है, तो वह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। दूसरी ओर, शुभ ग्रहों की स्थिति व्यक्ति को दीर्घायु, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और मानसिक शांति प्रदान करती है।

ग्रहों और स्वास्थ्य का संबंध

ग्रहों और स्वास्थ्य का संबंध

ज्योतिष में नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) का हमारे शरीर के विभिन्न अंगों और मानसिक स्थिति से गहरा संबंध माना जाता है। यदि किसी ग्रह की स्थिति कुंडली में कमजोर हो या वह नकारात्मक प्रभाव डाल रहा हो, तो वह संबंधित अंगों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

सूर्य – आत्मबल और हड्डियों से संबंधित रोग

  • शरीरिक प्रभाव: हड्डियों की कमजोरी, नेत्र रोग, त्वचा विकार, सिर दर्द, उच्च रक्तचाप
  • मानसिक प्रभाव: अहंकार, आत्म-संदेह, क्रोध, तनाव
  • सूर्य मजबूत हो तो: व्यक्ति का आत्मविश्वास मजबूत होता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता अच्छी रहती है।
  • सूर्य कमजोर हो तो: व्यक्ति को हड्डियों और नेत्र संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं, आत्म-सम्मान की कमी हो सकती है।

चंद्रमा – मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन

  • शारीरिक प्रभाव: पेट की समस्या, जल संबंधी रोग, फेफड़ों की कमजोरी, अनिद्रा
  • मानसिक प्रभाव: तनाव, अवसाद, चिंता, मूड स्विंग
  • चंद्रमा मजबूत हो तो: व्यक्ति भावनात्मक रूप से संतुलित रहता है, मन शांत रहता है।
  • चंद्रमा कमजोर हो तो: अनिद्रा, मानसिक अस्थिरता और चिंता बढ़ सकती है।

मंगल – रक्त और ऊर्जा का कारक

  • शारीरिक प्रभाव: रक्तचाप, सूजन, चोट-फ्रैक्चर, जलन, त्वचा रोग
  • मानसिक प्रभाव: आक्रामकता, चिड़चिड़ापन, तनाव, क्रोध
  • मंगल मजबूत हो तो: व्यक्ति ऊर्जावान रहता है, रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है।
  • मंगल कमजोर हो तो: रक्तचाप, सिरदर्द, चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है।

बुध – बुद्धि और तंत्रिका तंत्र

  • शारीरिक प्रभाव: त्वचा रोग, स्नायविक समस्याएँ, हाथ-पैरों की कमजोरी
  • मानसिक प्रभाव: संचार कौशल में कमी, स्मरण शक्ति की समस्या, भ्रम, मानसिक थकान
  • बुध मजबूत हो तो: व्यक्ति की बुद्धि तीव्र होती है, संवाद कुशलता अच्छी होती है।
  • बुध कमजोर हो तो: मानसिक भ्रम, डिप्रेशन और बोलने में कठिनाई हो सकती है।

गुरु – पाचन तंत्र और मोटापा

  • शारीरिक प्रभाव: मोटापा, पाचन तंत्र की समस्या, डायबिटीज, लिवर की कमजोरी
  • मानसिक प्रभाव: निर्णय लेने में कठिनाई, आलस्य, ज्ञान की कमी
  • गुरु मजबूत हो तो: व्यक्ति का पाचन अच्छा रहता है, मानसिक शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
  • गुरु कमजोर हो तो: व्यक्ति को पाचन संबंधी समस्या, मोटापा और सुस्ती हो सकती है।

शुक्र – प्रजनन तंत्र और त्वचा

  • शारीरिक प्रभाव: हार्मोनल समस्या, किडनी संबंधी रोग, त्वचा और सौंदर्य से जुड़े विकार
  • मानसिक प्रभाव: अधिक भौतिक सुख की लालसा, प्रेम संबंधी असफलता का तनाव
  • शुक्र मजबूत हो तो: व्यक्ति का शरीर आकर्षक होता है, हार्मोन संतुलित रहते हैं।
  • शुक्र कमजोर हो तो: त्वचा रोग, किडनी रोग, यौन समस्याएँ हो सकती हैं।

शनि – हड्डियाँ और तंत्रिका तंत्र

  • शारीरिक प्रभाव: गठिया, जोड़ो का दर्द, नाड़ी तंत्र की कमजोरी, लकवा
  • मानसिक प्रभाव: अकेलापन, चिंता, अवसाद, नकारात्मक सोच
  • शनि मजबूत हो तो: व्यक्ति अनुशासित और संयमित रहता है।
  • शनि कमजोर हो तो: व्यक्ति को डिप्रेशन, हड्डी रोग और अकेलापन महसूस हो सकता है।

राहु – भ्रम और मानसिक अस्थिरता

  • शारीरिक प्रभाव: नशे की लत, विषैले पदार्थों से जुड़ी बीमारियाँ, चर्म रोग
  • मानसिक प्रभाव: दिमागी अस्थिरता, नकारात्मक विचार, भय, व्यसन की प्रवृत्ति
  • राहु मजबूत हो तो: व्यक्ति तकनीकी रूप से कुशल और चतुर होता है।
  • राहु कमजोर हो तो: व्यक्ति भ्रमित रहता है, गलत निर्णय ले सकता है।

केतु – आध्यात्मिकता और मानसिक शांति

  • शारीरिक प्रभाव: अचानक बीमारियाँ, पेट की समस्या, त्वचा विकार
  • मानसिक प्रभाव: मन भटकना, एकाग्रता में कमी, आध्यात्मिकता की ओर झुकाव
  • केतु मजबूत हो तो: व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से प्रगति करता है, मानसिक शांति बनी रहती है।
  • केतु कमजोर हो तो: व्यक्ति मानसिक रूप से भ्रमित रह सकता है।

स्वास्थ्य सुधारने के ज्योतिषीय उपाय

स्वास्थ्य सुधारने के ज्योतिषीय उपाय

  • सूर्य कमजोर हो तो – प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
  • चंद्रमा कमजोर हो तो – मोती धारण करें, शिवजी की उपासना करें।
  • मंगल कमजोर हो तो – हनुमान चालीसा का पाठ करें, मसूर की दाल का दान करें।
  • बुध कमजोर हो तो – हरे रंग के वस्त्र पहनें, गणेशजी की पूजा करें।
  • गुरु कमजोर हो तो – केसर का तिलक करें, पीले वस्त्र पहनें।
  • शुक्र कमजोर हो तो – सफेद वस्त्र पहनें, रत्न के रूप में हीरा या ओपल धारण करें।
  • शनि कमजोर हो तो – शनिदेव की पूजा करें, काली उड़द का दान करें।
  • राहु-केतु अशुभ हों तो – राहु-केतु मंत्र का जाप करें, नारियल जल में प्रवाहित करें।

  • ग्रहों की स्थिति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • सही उपायों और योग साधना से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • यदि किसी ग्रह का अशुभ प्रभाव हो, तो संबंधित उपाय करने से स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।

इंदौर राऊ, के निवासी को ग्रहों के उपाय से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार मिला!

मेरा नाम दीपक मिश्रा है, मैं इंदौर, राऊ में रहता हूँ। लंबे समय से अनिद्रा, मानसिक तनाव और पेट की समस्याओं से परेशान था। डॉक्टरों से इलाज करवाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं मिल रहा था। तब मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क किया। उन्होंने मेरी कुंडली का विश्लेषण कर बताया कि चंद्रमा कमजोर है और राहु का प्रभाव मानसिक अस्थिरता और पाचन तंत्र की समस्याएँ पैदा कर रहा है। उन्होंने सोमवार को शिव अभिषेक, मोती रत्न धारण करने और रात को तांबे के लोटे में पानी रखकर सुबह पीने की सलाह दी। उपाय करने के बाद मेरी नींद में सुधार हुआ, मानसिक शांति मिली और स्वास्थ्य बेहतर हो गया।

महू, इंदौर के निवासी को ग्रहों के उपाय से मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ मिला!

मेरा नाम अनिल शर्मा है, मैं इंदौर, महू में रहता हूँ। लंबे समय से डिप्रेशन, चिंता और सिरदर्द जैसी समस्याओं से परेशान था। इलाज कराने के बाद भी राहत नहीं मिल रही थी। तब मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क किया। उन्होंने मेरी कुंडली का विश्लेषण कर बताया कि चंद्रमा और शनि की अशुभ स्थिति मानसिक अस्थिरता और तनाव का कारण बन रही है। उन्होंने सोमवार को शिवलिंग पर दूध अर्पित करने, रुद्राक्ष धारण करने और घर में चंदन की खुशबू रखने की सलाह दी। उपाय करने के कुछ समय बाद मेरा मानसिक तनाव कम हुआ, नींद बेहतर हुई और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई।

गूगल में जाकर आप हमारे रिव्यू देख सकते हैं

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428, 4th Floor, Orbit Mall
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क्या आपकी कुंडली में किसी दुर्लभ बीमारी का योग है?

 क्या आपकी कुंडली में किसी दुर्लभ बीमारी का योग है?

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दुर्लभ बीमारी का योग

ज्योतिष शास्त्र केवल आपके भविष्य, विवाह या करियर की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेत भी देता है। कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनका परस्पर प्रभाव यह बता सकता है कि व्यक्ति को जीवन में किस प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन क्या आपकी कुंडली में किसी दुर्लभ बीमारी का योग है? आइए ज्योतिषीय दृष्टि से इस विषय को विस्तार से समझते हैं।

स्वास्थ्य और ज्योतिष का गहरा संबंध:

स्वास्थ्य और ज्योतिष

ज्योतिष में बारह भाव होते हैं और हर भाव जीवन के किसी विशेष पहलू को दर्शाता है। स्वास्थ्य की बात करें तो छठा, आठवां और बारहवां भाव बीमारियों, दुर्घटनाओं और अस्पताल में भर्ती होने के योग को दर्शाते हैं। अगर इन भावों पर पाप ग्रहों ( मंगल , राहुकेतुशनि) की दृष्टि होती है या इन भावों के स्वामी कमजोर स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति को गंभीर या दुर्लभ बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

किस ग्रह से कौन-सी बीमारी होती है?

  • सूर्य: हृदय रोग, आंखों की समस्या, त्वचा विकार।

  • चंद्रमा: मानसिक रोग, डिप्रेशन, सर्दी-खांसी, अस्थमा।

  • मंगल: रक्त विकार, चोट, सर्जरी, बुखार।

  • बुध: तंत्रिका तंत्र, त्वचा रोग, बोलने में कठिनाई।

  • गुरु: मोटापा, लीवर की समस्या, डायबिटीज।

  • शुक्र: प्रजनन अंगों से जुड़ी समस्याएं, हार्मोनल डिसऑर्डर।

  • शनि: गठिया, पुरानी बीमारियां, लकवा।

  • राहु: रहस्यमय बीमारियां, नशे की लत, कैंसर।

  • केतु: त्वचा रोग, एलर्जी, अनिर्धारित बीमारियां।

दुर्लभ बीमारियों के ज्योतिषीय योग:

  1. राहु और केतु का छठे, आठवें या बारहवें भाव में होना।

  2. शनि और मंगल का एक साथ अशुभ भाव में स्थित होना।

  3. चंद्रमा पर राहु-केतु की दृष्टि या इनका साथ होना।

  4. लग्नेश की कमजोर स्थिति या पाप ग्रहों की दृष्टि।

  5. गुरु की कमजोर स्थिति के कारण रोगों से लड़ने की शक्ति में कमी।

बीमारियों से बचाव के ज्योतिषीय उपाय:

ज्योतिषीय उपाय
मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें।

स्वास्थ्य जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है और ज्योतिष शास्त्र इस बारे में आपको सचेत कर सकता है। अगर आपकी कुंडली में किसी दुर्लभ बीमारी का योग है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। उचित उपाय और सतर्कता से आप इन समस्याओं को टाल सकते हैं। यदि आप अपनी कुंडली का विश्लेषण कराना चाहते हैं, तो "इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी" से संपर्क करें। उनकी गहरी ज्योतिषीय जानकारी और मार्गदर्शन आपके लिए अमूल्य साबित हो सकता है।


बापट चौराहा इंदौर, के निवासी को कुंडली विश्लेषण से स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान

मेरा नाम अजय वर्मा है, मैं बापट चौराहा, इंदौर में रहता हूँ। पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां झेल रहा था, लेकिन डॉक्टर भी सटीक कारण नहीं बता पा रहे थे। बार-बार नई बीमारियां उभर रही थीं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ गया था। तब मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क किया। उन्होंने मेरी कुंडली का विश्लेषण किया और बताया कि ग्रहों की स्थिति दुर्लभ बीमारी का योग बना रही है, विशेष रूप से शनि और राहु का प्रभाव अधिक है। उनके बताए गए उपायों जैसे महामृत्युंजय मंत्र जाप और ग्रह शांति पूजा करने से धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।

स्कीम नंबर 78 इंदौर, के निवासी को ज्योतिषीय उपायों से बीमारी में राहत

मेरा नाम विकास चौधरी है, मैं स्कीम नंबर 78, इंदौर में रहता हूँ। लंबे समय से मैं एक अज्ञात बीमारी से परेशान था, कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। तब मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क किया। उन्होंने मेरी कुंडली देखकर बताया कि शनि और केतु की अशुभ स्थिति के कारण यह समस्या बनी हुई है। उन्होंने मुझे पीपल के पेड़ की जड़ से जल अभिषेक करने और राहु-केतु शांति पूजा करवाने की सलाह दी। उपाय करने के कुछ ही समय बाद मैंने अपने स्वास्थ्य में सुधार महसूस किया और मानसिक शांति भी प्राप्त हुई।

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क्या ग्रहों की चाल आपके दिमागी तेज़ी को बढ़ा सकती है?

 

क्या ग्रहों की चाल आपके दिमागी तेज़ी को बढ़ा सकती है?

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ग्रहों की चाल

ज्योतिष शास्त्र में यह विश्वास किया जाता है कि हमारे जीवन में होने वाली घटनाओं और हमारे स्वभाव पर ग्रहों की स्थिति और उनकी चाल का गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी तरह, हमारी बौद्धिक क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और दिमागी तेज़ी भी ग्रहों के प्रभाव से जुड़ी होती है। तो क्या सच में  ग्रहों की चाल आपके मस्तिष्क को तेज़ और कुशाग्र बना सकती है? आइए जानते हैं।

कौन-कौन से ग्रह बौद्धिक क्षमता को प्रभावित करते हैं?

ग्रह बौद्धिक

बुध ग्रह:

  • बुध को ज्योतिष में बुद्धि, तर्कशक्ति, संवाद और निर्णय लेने की क्षमता का कारक माना जाता है। अगर बुध कुंडली में मजबूत स्थिति में हो, तो व्यक्ति की दिमागी तेज़ी बढ़ती है। बुध की अनुकूल दशा में व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति और संचार कौशल उच्च स्तर पर होते हैं। यदि बुध अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को एकाग्रता में कमी, निर्णय लेने में असमंजस और संवाद में कठिनाइयाँ हो सकती हैं।

चंद्रमा:

  • चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा शुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति मानसिक रूप से शांत, संतुलित और केंद्रित रहता है। इससे उसकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति बेहतर होती है, जो दिमागी तेज़ी को बढ़ाती है। अशुभ चंद्रमा मानसिक तनाव, अवसाद और भ्रम जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है, जिससे सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित होती है।

गुरु:
  • गुरु ज्ञान, शिक्षा और दर्शन का ग्रह है। जब गुरु  शुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति में ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा और क्षमता बढ़ती है। यह व्यक्ति को समझदार, तार्किक और दूरदर्शी बनाता है। अशुभ गुरु  गलत निर्णय, आलस्य और अधूरे ज्ञान का कारण बन सकता है।
सूर्य:
  • सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति का प्रतीक है। जब सूर्य मजबूत स्थिति में होता है, तो व्यक्ति आत्मविश्वासी और स्पष्ट सोच वाला होता है, जिससे उसकी दिमागी तेज़ी बढ़ती है। सूर्य की कमजोर स्थिति व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी, भ्रम और अनिर्णय को जन्म देती है।
मंगल:
  • मंगल ऊर्जा, साहस और क्रियाशीलता का ग्रह है। मंगल की अनुकूल स्थिति से व्यक्ति की एकाग्रता और कार्य करने की गति बढ़ती है। यह ग्रह निर्णय लेने में तेजी लाता है। यदि मंगल अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति जल्दबाजी में गलत निर्णय ले सकता है और आक्रामक स्वभाव के कारण रिश्तों में समस्याएँ आ सकती हैं।

ग्रहों की चाल से दिमागी तेज़ी कैसे बढ़ती है?

  • जब बुधगुरु और सूर्य अनुकूल चाल में होते हैं, तो व्यक्ति की मानसिक शक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और तार्किक सोच में सुधार होता है।

  • चंद्रमा की शुभ दशा से मन शांत रहता है, जिससे एकाग्रता और रचनात्मकता बढ़ती है।

  • मंगल की तेज चाल व्यक्ति में त्वरित निर्णय लेने और कार्यक्षमता को बढ़ाती है।

  • गुरु  की चाल व्यक्ति को ज्ञान और दूरदर्शिता प्रदान करती है, जिससे दीर्घकालिक योजनाओं में सफलता मिलती है।

  • राहु और केतु की स्थिति भी मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है। शुभ राहु व्यक्ति को नवीन विचार और अनोखी सोच प्रदान करता है, जबकि अशुभ राहु भ्रम और अनिर्णय को जन्म देता है। केतु की सकारात्मक स्थिति ध्यान और अंतर्ज्ञान को बढ़ाती है।

दिमागी तेज़ी बढ़ाने के ज्योतिषीय उपाय:

ज्योतिषीय उपाय
  • बुध के लिए: बुधवार को हरे वस्त्र पहनें, हरे मूंग का दान करें और ओम बुधाय नमः मंत्र का जाप करें। बुध के लिए पन्ना रत्न धारण करना भी लाभकारी होता है।

  • गुरु के लिए: बृहस्पतिवार को पीले वस्त्र पहनें, चने की दाल का दान करें और ओम बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप करें। पुखराज रत्न धारण करने से गुरु की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

  • चंद्रमा के लिए: सोमवार को सफेद वस्त्र पहनें, दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें और ओम सोमाय नमः मंत्र का जाप करें। चंद्रमा के लिए मोती रत्न धारण करना शुभ होता है।

  • सूर्य के लिए: रविवार को तांबे के बर्तन में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य दें और ओम घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें। माणिक रत्न सूर्य की शक्ति को बढ़ाता है।

  • मंगल के लिए: मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करें, लाल वस्त्र पहनें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगल के लिए मूंगा रत्न धारण करना लाभकारी होता है।

अतिरिक्त उपाय:

  • नियमित रूप से योग और ध्यान करें, जिससे मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़े।

  • प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें, यह आपके आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति को बढ़ाता है।

  • सकारात्मक सोच बनाए रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

 ग्रहों की चाल हमारे मानसिक स्वास्थ्य और बौद्धिक क्षमता को बहुत प्रभावित करती है। अगर आपकी कुंडली में बुधगुरु , चंद्रमासूर्य  और मंगल की स्थिति अनुकूल है, तो आपकी दिमागी तेज़ी और निर्णय लेने की क्षमता भी बेहतर होगी। अपनी कुंडली का सही विश्लेषण करवाकर और उचित ज्योतिषीय उपाय अपनाकर आप अपनी बौद्धिक शक्ति को और भी बढ़ा सकते हैं।

विजय नगर इंदौर, के निवासी को ग्रहों के प्रभाव से मिली दिमागी तेज़ी!

मेरा नाम रोहित वर्मा है, मैं विजय नगर, इंदौर में रहता हूँ। पढ़ाई और निर्णय लेने में हमेशा देरी हो जाती थी, चीजें जल्दी समझ में नहीं आती थीं। प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता नहीं मिल रही थी। तब मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क किया। उन्होंने मेरी कुंडली देखकर बताया कि बुध ग्रह कमजोर होने के कारण मानसिक एकाग्रता कम हो रही है। उन्होंने हरे रंग के वस्त्र पहनने, बुधवार को हरे मूंग का दान करने और गणपति उपासना करने की सलाह दी। उपाय करने के बाद मेरी याददाश्त तेज़ हुई और मैं बेहतर निर्णय लेने लगा।

महू नाका इंदौर, की निवासी को ग्रहों के प्रभाव से मिली बुद्धिमत्ता में वृद्धि!

मेरा नाम पूनम शर्मा है, मैं महू नाका, इंदौर में रहती हूँ। मैं गणित और तर्कशक्ति से जुड़े विषयों में कमजोर थी, जल्दी चीजें भूल जाती थी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती थी। मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से अपनी कुंडली दिखाई। उन्होंने बताया कि चंद्रमा और बुध के अशुभ प्रभाव के कारण यह समस्या हो रही है। उन्होंने चांदी की चेन पहनने, रोज़ मिश्री का सेवन करने और सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करने की सलाह दी। उपायों के बाद मेरी स्मरण शक्ति में सुधार हुआ और पढ़ाई में अच्छे परिणाम आने लगे।

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