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माँ काली की आराधना से राहु-केतु के प्रभाव को नियंत्रित करने के उपाय
माँ काली की आराधना से राहु-केतु के प्रभाव को नियंत्रित करने के उपाय
माँ काली की आराधना
माँ काली को शक्ति, संरक्षण और अज्ञानता से मुक्ति की देवी माना जाता है। उनकी पूजा से जीवन में आने वाली परेशानियाँ, खासकर राहु और केतु के दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता है। राहु और केतु दोनों ही छाया ग्रह माने जाते हैं, जिनका प्रभाव जीवन पर व्यापारिक विघ्न, स्वास्थ्य समस्याएँ, मन-मस्तिष्क की अशांति, और कर्मों में विफलता के रूप में दिखाई देता है।
माँ काली की आराधना से राहु-केतु के प्रभाव को नियंत्रित करने के कुछ प्रमुख उपाय:
माँ काली की आराधना से राहु-केतु
माँ काली का मंत्र जाप:राहु और केतु के दुष्प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए माँ काली का मंत्र जाप अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जाप राहु-केतु के प्रभाव को कम करने में मदद करता है
इस मंत्र का 108 बार जाप रोज़ सुबह और शाम करने से राहु और केतु के दुष्प्रभावों से राहत मिलती है।
माँ काली की पूजा अर्चना:माँ काली की विशेष पूजा करके भी राहु-केतु के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है। पूजा करते समय राहु और केतु के रत्न (जैसे गुम्बा, हाकीक, आदि) रखने से भी इन ग्रहों के दुष्प्रभावों में कमी आती है।
पूजा करते समय काले तिल, शहद, काले फूल और काले कपड़े का प्रयोग करें, क्योंकि ये रंग और वस्तुएं माँ काली के साथ जुड़ी होती हैं।
माँ काली की विशेष साधना:नवरात्रि में माँ काली की विशेष साधना करना अत्यंत लाभकारी होता है। नवरात्रि में काली के मंत्रों का जाप करके और काली पूजा से राहु-केतु के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेष रूप से सप्ताह में एक दिन (रविवार या मंगलवार) को माँ काली के चरणों में काले तिल का तिलक और दीपक जलाना राहु-केतु के प्रभाव को दूर करता है।
माँ काली की साधना में व्रत रखना:
व्रत रखने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और राहु-केतु के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। माँ काली का व्रत हर सोमवार या मंगलवार को रखें। इस दिन नमक, मांसाहार और अल्कोहल से बचें और माँ काली का अर्चन एवं मंत्र जाप करें।
काले रंग के रत्न पहनें:
काले रंग के रत्न, जैसे हाकीक, शंकोर और गमला पहनने से भी राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं। इन रत्नों को काली माँ की पूजा के बाद धारण करना शुभ रहता है। खासकर काली धातु की अंगूठी भी राहु और केतु के प्रभाव को दूर करती है।
नदी में काले तिल का दान करें:
राहु-केतु के प्रभाव से राहत पाने के लिए नदी में काले तिल का दान करें। यह कर्म पुण्य का कार्य होता है और राहु-केतु के कुप्रभावों को कम करता है।
माँ काली की आराधना से न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि राहु और केतु जैसे दुष्प्रभावों को भी नियंत्रित किया जा सकता है। उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का संचार होता है। उनका भव्य मंत्र जाप, पूजा अर्चना और व्रत राहु-केतु के प्रभाव को कम करने में अत्यधिक प्रभावी हैं।
" सिलिकॉन सिटी इंदौर, के निवासी को माँ काली की आराधना से राहु-केतु के प्रभाव से मिली मुक्ति!"
मेरा नाम सुमित पटेल है, मैं इंदौर, सिलिकॉन सिटी में रहता हूँ। मेरी कुंडली में राहु-केतु दोष था, जिससे जीवन में लगातार विपत्तियाँ और मानसिक तनाव बना रहता था। मैंने ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क किया। उन्होंने मेरी कुंडली का विश्लेषण कर मुझे माँ काली की विशेष पूजा और हर शनिवार काली चालीसा का पाठ करने का सुझाव दिया। साहू जी के बताए अनुसार मैंने नियमित काली माँ के मंत्रों का जाप किया और राहु-केतु शांति यज्ञ भी करवाया। कुछ ही महीनों में जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला और मानसिक शांति प्राप्त हुई
" स्कीम नंबर 54 इंदौर, के निवासी को माँ काली की आराधना से राहु-केतु के दोष से मिली राहत!"
मेरा नाम रजनीश तिवारी है, मैं इंदौर, स्कीम नंबर 54 में रहता हूँ। लंबे समय से मैं राहु-केतु के दोषों से परेशान था—हर काम में अवरोध, स्वास्थ्य समस्याएं, और आर्थिक संकट झेल रहा था। तभी किसी ने मुझे ज्योतिषाचार्य मनोज साहू जी से संपर्क करने की सलाह दी। साहू जी ने मेरी कुंडली देखी और मुझे माँ काली की आराधना करने का सुझाव दिया। उन्होंने मुझे शनिवार के दिन काली मंदिर जाकर काली चालीसा का पाठ और सच्चे मन से माँ की पूजा करने को कहा। कुछ ही हफ्तों में मैंने अपने जीवन में शांति, सफलता, और सकारात्मकता महसूस की।